देवी दुर्गा मईया /दिवेश साहू /Chhattisgarhi विसर्जन jas lyrics
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गीत-हे जगतारण देवी दुर्गा मईया
गायक -दिवेश साहू
गीतकार - गौतम गुरु जी
म्यूजिक कंपनी -LKS video
वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे
मुखड़ा
हे जगतारण देवी दुर्गा मईया -- हे जगतारण देवी दुर्गा मईया-2
उड़ान - कइसे करबो दाई तोर विदाई ,लागत हावे भारी करलाई-2
जोत जंवारा हावे उसलईया---
हे जगतारण देवी दुर्गा मईया
हे जगतारण देवी दुर्गा मईया -- हे जगतारण देवी दुर्गा मईया-2
अंतरा -1
जब जब तोला देखव मईया तोरे मुहरन फुले ओ माँ
नजरे नजर मा झूले तैहर ,अंतस कईसे भूले ओ माँ
उड़ान -जइसे बेटी तीजा पहुना आथे ,जोड़ मया ला ओहर चले जाथे
अइसन दया मया के हस जगइया
हे जगतारण देवी दुर्गा मईया
हे जगतारण देवी दुर्गा मईया -- हे जगतारण देवी दुर्गा मईया-2
अंतरा -2
नवदिन पूजा वरत करे हव ,दसमी के तोला पठोहू ओ माँ
चलगे पुरखा के अजब चलागन सगरी म तोला सरोहु ओ माँ
उड़ान -कईसन कईसन रचना ला बनाये ,नेग जोंग गढ़के रस्दा ला बताये
जान तिहि हर दाई जनम देवईया
हे जगतारण देवी दुर्गा मईया
हे जगतारण देवी दुर्गा मईया -- हे जगतारण देवी दुर्गा मईया-2
अंतरा -3
माता बिदाई के आथे बेरा मन हां मोर सुरर्थे ओ माँ
काबर आथे ये दिन बादर रहिके जिवरा जूरथे ओ माँ
उड़ान -छाती फटे नैना आँशु ढारे ,तोर बिना अब करहि कोन दुलारे
काहा पाबे गौतम अचरा के छईया
हे जगतारण देवी दुर्गा मईया
हे जगतारण देवी दुर्गा मईया -- हे जगतारण देवी दुर्गा मईया-2
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👉 आवो देवी दुर्गा हमरो दुवरिया जसगीत
👉 हे मैया माता सेवा मा चले आबे जसगीत
👉 दुर्गा दाई के अंगना मा बोयेव जंवारा जसगीत
👉 लहराये जंवारा हरियर हरियर जसगीत
ये जसगीत म भक्त मन दुर्गा मईया के विदाई बेरा के दुख ला बतावत हें।
नव दिन तक पूजा, जंवारा अउ जोत जलाके मईया ला घर म बिठाय जाथे, फेर दसमी के दिन बिदाई के बेरा आथे त भक्त मन के मन भारी हो जाथे।
गीत म मईया ला बेटी जइसने मान के बताय गे हवय — जइसे तीजा म बेटी घर आथे अउ फेर विदा हो जाथे, वइसने दुर्गा मईया घलो नव दिन रहिके अपन धाम ल चल देथे।
भक्त कहिथे कि तोर बिना कोन दुलार करही, तोर अचरा के छईया काबर छोड़ के जात हस।
इ गीत म मया, भक्ति अउ बिदाई के गहिर भाव झलकथे।
ये गीत दुर्गा बिदाई के भाव म आधारित हवय
नवदुर्गा पूजा अउ जंवारा परंपरा के वर्णन हवय
बेटी के बिदाई से तुलना करके भावुक बनाय गे हवय
जसगीत गावे के बेरा माहौल भावुक हो जाथे
ग्रामीण छत्तीसगढ़ी संस्कृति के झलक मिलथे
भक्ति अउ मया के सुंदर मेल हवय
जंवारा जोत के उल्लेख खास बनाथे
दसमी विदाई के परंपरा ला दिखाथेवो
नवरात्रि के पहिली दिन गांव म बाजा गूंजिस। घर-घर म जंवारा बोये गिस, जोत जलाय गिस अउ भक्त मन दुर्गा मईया ला निमंत्रण देइन।
गांव के मंदिर म सजावट होइस, लाल चुनरी, नारियल, फूल म पूरा माहौल भक्ति म डूब गिस।
नव दिन तक गांव के महिलामन बिहान ले संझा तक पूजा करंय। जसगीत गूंजत रहिस — “हे जगतारण देवी दुर्गा मईया…”
छोटे-छोटे लइका मन घलो हाथ जोड़े मईया ला प्रणाम करंय। सबो मन के मन म एकेच भावना रहिस — मईया घर म आय हें।
दिन गुजरत गिस। नवमी बीत गिस। दसमी के बिहान जइसेच आइस, सबके मन भारी होगे।
जंवारा ऊँच होगे रहिस, जोत अब्बड़ उज्जर जलत रहिस, फेर सबो जानत रहिन — आज बिदाई के बेरा आय हवय।
महिलामन रोवत-रोवत आरती करिन। कोनो कहत रहिस – “मईया, अगला बरस जल्दी आना”
कोनो कहत रहिस – “हमर घर म सुख-शांति बनाय रखना”
जइसे बेटी तीजा म आथे अउ फेर विदा होथे, वइसने मईया घलो अपन धाम ल जावत हें।
जंवारा लेके गांव वाले नदी तीर गिन। ढोलक बजत रहिस फेर मन म उदासी रहिस।
जंवारा विसर्जन के बेरा सबो के आंखी म आंसू आ गे।
कोनो धीरे ले गुनगुनाइस — “कइसे करबो दाई तोर विदाई…”
मईया के बिदाई होइस, फेर गांव म भक्ति के रंग छोड़ गिस।
सबो मन एकेच आस धरिन — अगला नवरात्रि म मईया फिर आही।



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